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अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें?

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Posted by WHRRC | June 10, 2026

अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें?
भारतीय कानून के अनुसार, यदि किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) जैसे चोरी, लूट, धोखाधड़ी, मारपीट, अपहरण, दहेज उत्पीड़न, बलात्कार आदि की सूचना पुलिस को दी जाती है, तो FIR दर्ज करना पुलिस का कानूनी दायित्व है।

यदि पुलिस FIR दर्ज करने से मना करती है, तो नागरिक निम्न कदम उठा सकते हैं:
1. लिखित शिकायत दें - सबसे पहले अपनी शिकायत लिखित रूप में थाना प्रभारी (SHO) को दें और प्राप्ति रसीद या डायरी नंबर प्राप्त करने का प्रयास करें।
2. पुलिस अधीक्षक (SP) से संपर्क करें - यदि थाना FIR दर्ज नहीं करता है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों के अनुसार आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत डाक, ईमेल या व्यक्तिगत रूप से भेज सकते हैं।
3. न्यायालय की सहायता लें - यदि SP स्तर पर भी कार्रवाई नहीं होती है, तो आप संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। न्यायालय पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दे सकता है।

संवेधानिक प्रावधान:
1. Zero FIR का अधिकार - यदि अपराध किसी अन्य क्षेत्र में हुआ है, तब भी आप किसी भी पुलिस थाने में Zero FIR दर्ज करा सकते हैं। बाद में मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित किया जाता है।
2. FIR की निःशुल्क प्रति प्राप्त करें - FIR दर्ज होने पर उसकी एक प्रति प्राप्त करना आपका अधिकार है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता।
3. महिला एवं कमजोर वर्गों के विशेष अधिकार - महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांग व्यक्तियों की शिकायतों पर विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। कुछ मामलों में पुलिस पीड़ित के निवास स्थान पर जाकर भी बयान दर्ज कर सकती है।

महत्वपूर्ण बात:
FIR दर्ज करवाना आपका कानूनी अधिकार है। यदि आपको न्याय प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, तो उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग करें और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए आज ही हमसे जुड़ें।

विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद्
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