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स्विट्जरलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजु ने महिला अधिकारों की प्रगति में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया

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Posted by WHRRC | August 13, 2026

जिनेवा, स्विट्जरलैंड | 12 अगस्त 2026 | विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् की चेयरपर्सन, भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता एवं अरुणाचल प्रदेश की प्रथम पीढ़ी की अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजु ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में पैनल सदस्य एवं युवा अधिवक्ता के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। जिनेवा में डॉ. ज्योति जोंग्लुजु की सहभागिता को महिला अधिकारों, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समानता के क्षेत्र में उनके निरंतर कार्यों की एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच से अपने विचार रखते हुए उन्होंने महिलाओं एवं युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित किया तथा इस बात पर जोर दिया कि लैंगिक समानता और महिला अधिकारों से संबंधित नीतियों का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक है। चर्चा के दौरान उन्होंने लैंगिक समानता से जुड़ी नीतियों और महिलाओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों के बीच की दूरी को कम करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें नीति निर्माण, जन-जागरूकता, नेतृत्व, एडवोकेसी तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सार्थक भूमिका मिलनी चाहिए। अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजु ने कहा, “वास्तविक बदलाव तब शुरू होता है, जब नीतियां उन लोगों के जीवन तक पहुंचती हैं, जिनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए वे बनाई गई हैं। युवा केवल भविष्य की आवाज नहीं हैं; उन्हें वर्तमान को आकार देने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदार बनना होगा।” अरुणाचल प्रदेश की प्रथम पीढ़ी की अधिवक्ता के रूप में डॉ. ज्योति जोंग्लुजु की पेशेवर यात्रा संघर्ष, दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करती है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे महिला अधिकारों, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाती रही हैं। अधिवक्ता डॉ. जोंग्लुजु विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व एवं एडवोकेसी मंचों पर सहभागिता कर चुकी हैं और वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। जिनेवा में WHO के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में उनकी सहभागिता समानता, महिला अधिकार, मानवाधिकार, युवा नेतृत्व और समावेशी विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अंतरराष्ट्रीय संवाद में युवा भारतीय पेशेवरों की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् की ओर से इस उपलब्धि को गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय युवाओं, विशेषकर महिलाओं की प्रभावी भागीदारी, देश की बढ़ती नेतृत्व क्षमता और वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक भूमिका को और मजबूत करती है। जिनेवा में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजु की निरंतर नेतृत्व एवं मानवाधिकार एडवोकेसी की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल भविष्य के नेतृत्व की प्रतीक्षा न करें, बल्कि वर्तमान में ही एक समान, न्यायपूर्ण, सुरक्षित और समावेशी समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें।



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