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विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् का विशेष अनुसंधान कार्यक्रम प्रारंभ

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Posted by WHRRC | September 08, 2026

देश के प्रख्यात विद्वान करेंगे अनुसंधान कार्य, कानून और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को सामने लाने का प्रयास

नई दिल्ली, 07 सितम्बर 2026। विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात विषय-विशेषज्ञों एवं विद्वानों के सहयोग से एक विशेष मानवाधिकार अनुसंधान कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सुप्रीमकोर्ट के स्पेशल काउंसिल डॉ. मनोज गोर्केला द्वारा किया गया। इस विशेष अनुसंधान कार्यक्रम के लिए देश के लगभग दस प्रतिष्ठित विद्वानों का चयन किया गया है। चयनित विद्वान अपने-अपने विषयों पर गहन एवं तथ्यपरक अनुसंधान करेंगे तथा अनुसंधान पत्र तैयार कर विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2026 में प्रस्तुत करेंगे। इन अनुसंधान कार्यों का उद्देश्य कानून में निर्धारित व्यवस्था और धरातल पर उसकी वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को सामने लाना तथा उसके समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करना है।

अनुसंधान कार्यक्रम के लिए चयनित प्रमुख विद्वानों में देश के प्रख्यात विधि विशेषज्ञ, अधिवक्ता, विधि शिक्षक, लेखक एवं प्रेरक वक्ता डॉ. मनमोहन जोशी (एम.जे. सर), जेल सुधार एवं जेल कानून के विशेषज्ञ तथा तिहाड़ जेल के पूर्व विधि अधिकारी श्री सुनील कुमार गुप्ता, खेड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य-न्यायाधीश डॉ. संदीप कुमार आर. पांड्या, एलएनयुपीई के पूर्व अधिकारी, प्रोफ़ेसर, अधिवक्ता एवं लेखक डॉ. आर. एस. चौहान, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व विशेषज्ञ, अंतर्राष्ट्रीय नीति विशेषज्ञ, कृषि-व्यवसाय एवं संरचित बाजार विशेषज्ञ तथा लेखक डॉ. भारत कुलकर्णी, अंतर्राष्ट्रीय कानून के विद्वान एवं प्रसिद्ध अधिवक्ता श्री नवीन शेलर, विधि विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद् डॉ. वैशाली माथुर तथा असिस्टेंट प्रोफ़ेसर लॉ दिल्ली डॉ. पूजा सांगवान सहित अन्य प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मनोज गोर्केला ने अपने संबोधन में कहा कि देश के इतने प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विद्वानों के साथ मिलकर कार्य करना अपने आप में गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह अनुसंधान कार्यक्रम सामान्य प्रकृति का अनुसंधान कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि देश की वर्तमान व्यवस्था का दर्पण बनने का प्रयास करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुसंधान के दौरान प्राप्त निष्कर्षों एवं सभी अनुसंधान पत्रों की एक विशेष निर्देशिका तैयार की जानी चाहिए, जिसे सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जाए तथा सभी सांसदों तक भी पहुंचाया जाए। इससे कानूनों में निर्धारित प्रावधानों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच मौजूद कमियों एवं कारणों को समझने और उनमें आवश्यक सुधार करने में सहायता मिलेगी। डॉ. गोर्केला ने कहा कि भारत को शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अभी बहुत कार्य करने की आवश्यकता है और इस दिशा में पहल हमें स्वयं करनी होगी। उन्होंने कहा कि शोध केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य समाज और व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

जेल व्यवस्था एवं जेल कानून पर अनुसंधान का दायित्व संभाल रहे श्री सुनील कुमार गुप्ता ने भारत की जेल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बंदियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त जेल उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कानून अनुसार जितना स्थान एक बंदी को मिलना चाहिए इतने स्थान पर तीन बंदियों को रखा जा रहा है। यह स्थिति कानून में निर्धारित व्यवस्था और जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के माध्यम से ऐसी समस्याओं को तथ्यात्मक रूप से सामने लाकर उनके समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विद्वानों ने भी अपने-अपने विषयों से संबंधित प्रमुख समस्याओं, वर्तमान परिस्थितियों एवं अनुसंधान की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए। सभी विद्वानों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि इस अनुसंधान कार्य को राष्ट्र निर्माण, नीति सुधार और मानवाधिकारों के प्रभावी संरक्षण से जोड़ा जाएगा।

इस अनुसंधान कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में श्री नवीन शेलर का चयन किया गया है। वे समय-समय पर अनुसंधान टीम के सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अनुसंधान कार्य को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. शूलपाणी सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् मीडिया सेल ने सभी विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद् का उद्देश्य देश के अनुभवी एवं प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के अनुभव और ज्ञान को अनुसंधान प्रक्रिया से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में देश के न्यायाधीशों, राजदूतों, विद्वानों, नौकरशाहों, पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त व्यक्तित्वों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी इस अनुसंधान प्रोग्राम में मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आमंत्रित किया जाएगा, ताकि उनके अनुभवों और व्यावहारिक ज्ञान का लाभ अनुसंधान कार्यक्रम को मिल सके। डॉ. सिंह ने बताया कि परिषद् द्वारा आयोजित आगामी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2026 में संबंधित आयोगों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। अनुसंधान के दौरान तैयार किए गए शोध-पत्रों को आधिकारिक रूप से संबंधित आयोगों एवं संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इन शोध-पत्रों में सामने आए तथ्यों एवं सुझावों का संबंधित संस्थाओं द्वारा अध्ययन किए जाने तथा आवश्यकतानुसार नीतियों, नियमों एवं कानूनों में सुधार के लिए सुझाव दिए जाने की दिशा में भी परिषद् कार्य करेगी।

विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् का यह विशेष अनुसंधान कार्यक्रम देश में मानवाधिकार, न्याय, कानून, प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर तथ्यपरक अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा अनुसंधान के माध्यम से नीतिगत एवं सामाजिक सुधार की दिशा में योगदान देने की एक महत्वपूर्ण पहल है।



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